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कब्ज के लिए वैज्ञानिक रूप से सिद्ध प्राकृतिक उपचार

24 जून, 2024
कब्ज के लिए प्राकृतिक उपचार
समस्या

कब्ज और पेट की समस्याएं

कब्ज एक आम पाचन समस्या है जो हमारे देश में बहुत लोगों को प्रभावित करती है। कब्ज का मतलब सब के लिए अलग होता है। इसके मुख्य लक्षण अनियमित, कठिन या अपूर्ण मल त्याग हैं। इसके कारण असुविधा और असंतोष होता है जिससे जीवन की गुणवत्ता खराब होती है। इससे पेट में दर्द, बवासीर और एनल फिशर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं जो हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

उपचार

कब्ज का उपचार

कब्ज के इलाज के लिए आमतौर पर जीवनशैली और खान पान में बदलाव किया जाता है। इसके अलावा लेक्जेटिव (जुलाब/ रेचक दवाएँ) का उपयोग किया जाता है। जुलाब ऐसी दवाएं हैं जो मल त्याग को बढ़ावा देती हैं और कब्ज से राहत दिलाने में मदद करती हैं। लेकिन ज़्यादातर लोग इन उपचारों से असंतुष्ट हैं और जुलाब के उपयोग से संभावित दीर्घकालिक परिणामों के बारे में चिंतित रहते हैं।

फाइबर

फाइबर

कब्ज के इलाज़ के लिए फाइबर के सेवन को बढ़ाने की सलाह हमेशा दी जाती है। फाइबर एक कार्बोहाइड्रेट है जिसे हमारी आंत में पूरी तरह से पचा नहीं पाती है। वे मल की मात्रा बढ़ाने के साथ साथ विभिन्न तरीकों से कब्ज में सुधार करते हैं। लेकिन, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अधिक फाइबर का सेवन से पेट फूलना और पेट में सूजन जैसे दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

दिशानिर्देश

फाइबर के सेवन के लिए दिशानिर्देश

स्वस्थ आहार के लिए, कई देशों ने अपने दिशानिर्देश जारी किये हैं। ये राष्ट्रीय दिशानिर्देश बहुमूल्य सलाह देते हैं।

अमेरिकन आहार संबंधी दिशानिर्देश उम्र और लिंग के आधार पर दैनिक फाइबर सेवन के लिए निम्न सलाह देते हैं।

आयु वर्गमहिलापुरुष
30 और कम28 ग्राम34 ग्राम
31-5025 ग्राम31 ग्राम
51 और अधिक22 ग्राम28 ग्राम

यूरोपीय आहार दिशानिर्देशों के अनुसार, वयस्कों को प्रतिदिन 25-35 ग्राम आहार फाइबर का लक्ष्य रखना चाहिए, पुरुषों को 30-35 ग्राम और महिलाओं को 25-32 ग्राम फाइबर का सेवन करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) प्रतिदिन न्यूनतम 25 ग्राम से अधिक फाइबर का सेवन करने का सुझाव देता है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद का सुझाव है कि वयस्कों को अपने दैनिक आहार में 2000 कैलोरी के आधार पर कम से कम 40 ग्राम फाइबर शामिल करना चाहिए।

सतर्क रहें

कृपया ध्यान दें कि कब्ज कभी-कभी गंभीर बीमारियों का संकेत दे सकता है, जैसे कि कोलोरेक्टल कैंसर। इसलिए अपने डॉक्टर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है।

महत्व

अनुसंधान-आधारित उपचार का महत्व

फाइबर युक्त प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग लंबे समय से कब्ज के इलाज के लिए किया जाता रहा है, जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि इन सभी प्राकृतिक उपायों की प्रभावशीलता की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक शोध नहीं किया गया है।

आधुनिक चिकित्सा पद्धति में, उपचारों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए उनका वैज्ञानिक परीक्षण किया जाता है। वैज्ञानिक परीक्षण के बाद कुछ ही पारंपरिक उपचार कारगर साबित हुए हैं और ज्यादातर विफल हो जाते हैं। इसलिए किसी भी उपचार की वास्तविक प्रभावशीलता निर्धारित करने के लिए साक्ष्य-आधारित शोध पर भरोसा करना महत्वपूर्ण है।

इस लेख में, हम चिकित्सा अनुसंधान-सिद्ध प्रभावी प्राकृतिक उपचारों के बारे में जानेंगे जो कब्ज से राहत के लिए सौम्य और प्रभावी विकल्प प्रदान करते हैं।

प्रून जूस

सूखे आलूबुखारे का जूस (Prune juice)

सूखा आलूबुखारा जूस

सूखा आलूबुखारा एक बेर है, जिसे इंग्लिश में प्रून के नाम से जाना जाता है। आलूबुखारा फाइबर और सोर्बिटोल से भरपूर होता है, जो मल त्याग को नियमित करने में सहायता करता है। उदाहरण के लिए, 100 ग्राम आलूबुखारा में लगभग 7 ग्राम फाइबर होता है।

एक जापानी अध्ययन में प्रतिभागियों ने 8 सप्ताह तक प्रतिदिन 54 ग्राम प्रून जूस का सेवन किया। प्रून जूस ने प्रभावी रूप से सख्त और गांठदार मल की दर को कम कर दिया और सामान्य मल की दर में वृद्धि की। साथ ही, इससे पतले या पानी वाले मल में वृद्धि नहीं हुई। इसमें सोर्बिटोल, पेक्टिन और पॉलीफेनोल्स होते हैं जो मल त्याग को बेहतर बनाने के लिए काम करते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि, प्रून जूस ने साइड इफ़ेक्ट बिना कब्ज, कठोर मल, अपूर्ण निकासी और पेट फूलने की शिकायतों में सुधार किया। इससे सूखे आलूबुखारे के जूस को कब्ज के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी प्राकृतिक उपचार माना जा सकता है।

कीवी

कीवी फल

कीवी फल

न्यूजीलैंड, इटली और जापान में 184 लोगों के साथ किए गए एक बहुकेंद्रीय अध्ययन में शोधकर्ताओं ने देखा कि चार सप्ताह तक हर दिन दो हरे कीवी फल खाने से कब्ज या कब्ज-प्रमुख इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम (आईबीएस-सी) वाले लोगों में कब्ज और पेट के आराम पर क्या प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने पाया कि इन कीवी फलों को खाने से लोगों में हर हफ्ते सामान्य मल त्याग करने की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। पेट के लक्षणों को मापने वाले एक पैमाने के अनुसार, कीवी फल ने उनके पेट के लक्षणों को भी बेहतर बना दिया। कीवी फल का सेवन मल की नरमता, मल त्याग के दौरान कम प्रयास और जीवन की गुणवत्ता में सुधार से भी जुड़ा था।

कीवी फ्रूट में फाइबर होता है, जो फूलता है और पानी को रोकता है, मल को नरम करता है और मल त्याग को बढ़ाता है। रैफाइड्स जैसे घटक भी म्यूसिन उत्पादन को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे आंत्र के बेहतर कार्य में सहायता मिलती है।

इससे पता चलता है कि हरी कीवी फल खाना कब्ज का इलाज करने और आपके पेट को अधिक आरामदायक महसूस कराने का एक अच्छा तरीका हो सकता है। यह एक प्राकृतिक विकल्प है जिसे सहन करना अधिकांश लोगों के लिए आसान है।

इसबगोल

इसबगोल

इसबगोल

इसबगोल, प्लांटैगो ओवाटा पौधे के बीजों से प्राप्त एक प्राकृतिक फाइबर है। इसका व्यापक रूप से प्राकृतिक आहार फाइबर पूरक के रूप में उपयोग किया जाता है। यह भूसी, पाउडर और कैप्सूल जैसे विभिन्न रूपों में उपलब्ध है, जिससे इसे आपके आहार में शामिल करना आसान हो जाता है।

इसबगोल का इसके स्वास्थ्य लाभों के लिए बड़े पैमाने पर अध्ययन किया गया है। अधिकांश अध्ययनों में लगभग 10 ग्राम इसबगोल का उपयोग किया गया है। अनुसंधान दिखाता है कि इसबगोल मल की संख्या, मात्रा और गाढ़ापन में काफी सुधार करता है, और लोगों को शौच के दौरान दर्द भी काम हुआ। यह आंतों की चाल को बढ़ाता है और न्यूनतम दुष्प्रभावों के साथ अच्छी तरह से सहन किया जाता है। इसबगोल आंत की माइक्रोबायोटा संरचना, माइक्रोबियल विविधता में वृद्धि और कार्यात्मक रूपरेखा भी सकारात्मक रूप से बदलता है।

पानी के साथ मिश्रित होने पर इसबगोल एक जेल जैसा पदार्थ बनाकर शरीर में काम करता है। यह जेल आंत में भोजन को धीमी गति से आगे बढ़ाता है, जिससे बेहतर पाचन में मदद मिलती है। मधुमेह और कब्ज वाले लोगों के लिए, इसबगोल भोजन से शुगर को धीमी गति से अवशोषित करके रक्त में शुगर के स्तर में सुधार कर सकता है, जो इंसुलिन को नियंत्रित करने में मदद करता है। बैक्टीरिया आंत में इसबगोल को तोड़ कर शॉर्ट-चेन फैटी एसिड नामक सहायक पदार्थ पैदा करते हैं।

डॉक्टर से परामर्श

अपने डॉक्टर से कब परामर्श लें

यह जानना महत्वपूर्ण है कि जहां आलूबुखारा, इसबगोल और कीवी फ्रूट जैसे प्राकृतिक उपचार कब्ज में मदद कर सकते हैं, वहीं गंभीर या ना ठीक होने वाली समस्याओं के लिए चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता हो सकती है। लक्षणों और चेतावनी संकेतों पर ध्यान दें और यदि कुछ चिंताजनक नोटिस करें तो डॉक्टर से मिलें। हर शरीर अलग-अलग प्रतिक्रिया देता है, इसलिए इन सुझावों को धीरे-धीरे आज़माएँ और अपने शरीर की सुनें।

सतर्क रहें! स्वस्थ रहें! और खुश रहें!

Dr. Nikhil Agrawal

About Author

Dr. Nikhil Agrawal
MS, MCh

Dr. Nikhil Agrawal is a leading GI-HPB Surgical Oncologist with 20+ years of experience in complex cancers of the esophagus, stomach, colon, rectum, liver, pancreas, gallbladder, and bile ducts. He leads the GI-HPB Oncology Program at Apollo Hospitals, Delhi and Gurugram, with expertise in advanced robotic and laparoscopic cancer surgery.

His practice focuses on evidence-based, multidisciplinary care with an emphasis on individualized treatment and long-term outcomes.

He trained at BHU, SGPGI Lucknow, AIIMS New Delhi, and SNUBH, South Korea, and is a robotic surgery proctor who trains surgeons in advanced GI-HPB cancer surgery. He is also regularly invited as faculty at national and international scientific meetings.

This website helps patients and families understand GI and HPB diseases and cancers, treatment options, and what to expect during recovery and long-term care.